जीवन की आपाधापी और मानसिक तनाव अक्सर युवाओं को नशे के गलत रास्ते पर ले जाते हैं। ऐसे समय में ‘श्रीमद्भागवत गीता’ का ज्ञान एक प्रकाश स्तंभ की तरह कार्य करता है। गीता हमें सिखाती है कि इंद्रियों पर विजय कैसे प्राप्त करें और मन की चंचलता को कैसे नियंत्रित करें।
हमारा लक्ष्य ‘संकल्प से सिद्धि’ है। धार्मिक संस्थाओं के प्रमुखों के माध्यम से हम घर-घर जाकर गीता का वितरण कर रहे हैं। इस अभियान का उद्देश्य केवल पुस्तक देना नहीं, बल्कि जन-जन में नैतिक मूल्यों का संचार करना है।
जब युवा आध्यात्मिक रूप से जाग्रत होंगे, तो उनकी चेतना उन्हें स्वयं ही व्यसनों से दूर रखेगी। एक ‘चेतना युक्त जीवन’ ही एक स्वस्थ समाज का आधार है। गीता का बोध हमें सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में हार मानने के बजाय संकल्प के साथ लड़ना ही असली पुरुषार्थ है।
— Dr. Amit Kansal, Nasha Mukti Chetna Sangh